श्री नवकार महामंत्र का अर्थ
जैन धर्म का महाप्रभावशाली सर्वोच्च व शाश्वत मंत्र है -श्री नवकार महामंत्र इसे शास्त्रों में "श्री पंचपरमेष्ठी नमस्कार महामंत्र" व "श्री पंचमंगलमहाश्रुतस्कन्ध" भी कहते है ! ये दुनिया का ऐसा पहला मंत्र हैं जिसमे गुणों को पूजा गया हैं,इस महामंत्र के प्रत्येक अक्षर-अक्षर में अद्भुत शक्ति का भण्डार है | तीर्थंकर परमात्मा ने बताया है कि कोई भी सामान्य व्यक्ति शुभ कर्मो द्वारा व राग-द्वैष को छोड़कर चार कषायों क्रोध, मान, माया व् लोभ का नाश करके परमपद मोक्ष प्राप्त कर सकता है | इस मंत्र में सर्वप्रथम प्रथम पद में "नमो अरिहंताणं" बोला गया है जिसका अर्थ है- अरिहंतो को नमस्कार हो इसमें भूतकाल, भविष्यकाल व वर्तमानकाल में जितने भी अरिहंत ( तीर्थंकर) परमात्मा हो गये हैं, उन सभी को नमस्कार किया गया है | द्वितीय पद "नमो सिद्धाणं" है जिसका अर्थ है - सिद्ध भगवंतों को नमस्कार हो, इसमें भूतकाल, भविष्यकाल व वर्तमानकाल में जितने भी सिद्ध भगवंत हो गये हैं उन सभी को नमस्कार किया गया है | ...